सोमवार, 11 अप्रैल 2011

अन्ना का ढोलक बाजे मोदी को चमकाय
बेसुर होते ढोलक को बेदी ने ब्रेक लगाय
कुछ न होगा कानून से सिब्बलजी फ़रमाय
अपना अनुभव वकालती झटपट दिया बताय
मार गुलाटी बाबा ने पूर्वज याद दिलाय
बाबा के योग शिविर में गरीब पैठ न पाय
लोकपाल बना विवादित जनता को चकराय
बाल ठाकरे गरजे अन्ना  जी सो जाय

बाबा की पोल खुली अन्ना की पोल खुली
भाजपा की पोल खुली कांग्रेस की पोल खुली
यहाँ तो राजनीति पर राजनीति ही चली
राजनीति के स्पर्श  से जन्मते भ्रष्ट  औ' छली
ये लाचार जनता जाए तो जाए किस गली
भ्रष्टाचारियों के आगे किसी की न चली

 




1 टिप्पणी:

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