शनिवार, 1 जनवरी 2011

अरे तुम चौथे खम्भे नहीं हो




तुम
महादेवी की तरह नीर भरी बदली हो
या फिर मीरा बन कर विष पीते हो
अरे मूर्ख नीरा बन कर आगे आओ
बड़े-बड़े आफर लाओ
पैंतालीस मिनट में
पैंतालीस करोड़ कमाओ
क्या-क्या बतलाऊं रे बेजान
मैं हूँ इस लोकतंत्र का नेता महान

अरे तुम चौथे खम्भे नहीं हो
चौथे खूंटे हो
जिसमें तुम स्वयं बंधे हो
और जिस तीस ने खूंटा तोड़ा
मेरा पट्टा गले में बांधा
वही बनाते देश का चौथा खम्भा
अब तो मुझको पहचान
मैं हूँ इस लोकतंत्र का नेता महान

अरे चौकीदारी करते हो
और चोरी नहीं करते हो
फिर क्यों चौकीदारी करते हो?
मूड़-मुड़ाय हो जाओ सन्यासी
अरे सत्यानाशी
अधिकारों का दुरुपयोग ही
अधिकारी का अधिकार
मुझसे लो इस युग का ज्ञान
मैं हूँ इस लोकतंत्र का नेता महान

न लल्लू को खून की छूट
और न कल्लू को बलात्कार की छूट
मूरख कोई संगठन बनाओ
आन्दोलन चलाओ
लेवी लो/हत्या करो/बलात्कार करो
और मेरी नीति से छूट पाओ आसान
मैं हूँ इस लोकतंत्र का नेता महान

मत बन तू मुन्नी
मुन्नी हो जाती है बदनाम
बनना हो तो अरुन्धती बन
शहरों की हीरोइन
और वन की नायिका बन
माँ की गोद को डंस
आओ मेरे पास विहंस
करो हास-परिहास रात-विहान
मैं हूँ इस लोकतंत्र का नेता महान 

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