शनिवार, 14 मई 2011

वह

वह उनके बच्चों को
बस स्टाप तक पहुंचाती
सजा सवांर के
नाश्ता करा के
स्वयं भूखे पेट
किताबों का थैला ढोती
स्वयं किताबों से दूर
बचपन से दूर
परिवार की रोटी हो गयी
दिन भर एसी लगे घर में
काम करती
खटती
मरती
थकती
और रात में
पसीने से तरबतर
अपनी झोंपड़ी में
ढेर हो जाती
और आज और आज
उसकी झोपड़ी भी
बुलडोज़र के नीचे आ गयी
और और
आज की रात
बहुत भयावह होगी
कोई सरकार
कोई न्यायलय
कोई पहरेदार
उसके बचपन को
तार तार होने से बचा नहीं पायेगा
वह सब्जी बन जाएगी.......

 

6 टिप्‍पणियां:

  1. शुभागमन...!
    आपके हिन्दी ब्लागिंग के अभियान को सफलतापूर्वक उन्नति की राह पर बनाये रखने में मददगार 'नजरिया' ब्लाग की पोस्ट नये ब्लाग लेखकों के लिये उपयोगी सुझाव. और ऐसे ही अन्य ब्लागर्स उपयोगी लेखों के साथ ही अपने व अपने परिवार के स्वास्थ्योपयोगी जानकारियों से परिपूर्ण 'स्वास्थ्य-सुख' ब्लाग की पोस्ट बेहतर स्वास्थ्य की संजीवनी- त्रिफला चूर्ण एक बार अवश्य देखें और यदि इन दोनों ब्लाग्स में प्रस्तुत जानकारियां अपने मित्रों व परिजनों सहित आपको अपने जीवन में स्वस्थ व उन्नति की राह में अग्रसर बनाये रखने में मददगार लगे तो भविष्य की उपयोगिता के लिये इन्हें फालो भी अवश्य करें । धन्यवाद के साथ शुभकामनाओं सहित...

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  2. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 17 - 05 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  3. आज की रात
    बहुत भयावह होगी
    कोई सरकार
    कोई न्यायलय
    कोई पहरेदार
    उसके बचपन को
    तार तार होने से बचा नहीं पायेगा
    वह सब्जी बन जाएगी....... dil ko sihrati rachna

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  4. रौंगटे खडे कर दिये………बेहद मार्मिक्।

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